उत्तरी छोटानागपुर में भाजपा का अभेद्य किला क्या दरकने वाला है?
झामुमो को प्रणव वर्मा से मिली नई राजनीतिक धार
रंजन कुमार
ब्यूरो
झारखंड की राजनीति में उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल को भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता है। इस क्षेत्र में कोडरमा, गिरिडीह, डुमरी, बगोदर, बड़कागांव, बरकट्ठा,बगोदर, जमुआ, हजारीबाग जैसे विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं—जहां बीते वर्षों में भाजपा ने एक के बाद एक बड़ी जीतें दर्ज की हैं। लेकिन अब इस ‘अभेद्य किले’ में झामुमो सेंध लगाने की स्थिति में नजर आ रहा है, और इसकी बड़ी वजह हैं—प्रणव वर्मा
प्रणव वर्मा, झामुमो के कुशल, जमीन से जुड़े और युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे नेता हैं। वे स्वर्गीय रितलाल वर्मा के पुत्र हैं, जो कोडरमा से पांच बार सांसद रह चुके हैं और क्षेत्र में अपनी ईमानदार छवि के लिए आज भी याद किए जाते हैं।
प्रणव वर्मा का संबंध कुशवाहा समाज से है, जिसकी उत्तरी छोटानागपुर में प्रभावशाली जनसंख्या है। खासकर कोडरमा, डुमरी, बगोदर, बरकट्ठा, चौपारण, बड़कागांव और हजारीबाग विधानसभा क्षेत्रों में इस समाज का वोट निर्णायक साबित होता रहा है। अब यदि यही वोट बैंक भाजपा से खिसक कर झामुमो की ओर आता है, तो इससे भाजपा को गहरा नुकसान और झामुमो को बड़ा फायदा हो सकता है,यह बात महत्वपूर्ण है कि अब तक कुशवाहा समाज का बड़ा हिस्सा परंपरागत रूप से भाजपा के साथ रहा है। लेकिन प्रणव वर्मा के सक्रिय होने के बाद इस समाज का झुकाव झामुमो की ओर होता दिख रहा है। झामुमो ने भी यह संकेत स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी अब सामाजिक संतुलन और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को गंभीरता से ले रही है।
समर्थकों की नाराजगी और वर्मा का बड़ा फैसला
प्रणव वर्मा को पिछले कई वर्षों से लोकसभा या विधानसभा चुनावों में टिकट देने की चर्चा होती रही है, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला। इससे उनके समर्थकों में नाराजगी व्याप्त है। बावजूद इसके, प्रणव वर्मा ने बगैर किसी शर्त के झामुमो से जुड़ने का निर्णय लिया—जो राजनीति में एक सकारात्मक और सच्चे सेवा भाव का उदाहरण माना जा रहा है।
झामुमो को जहां एक मजबूत, सुलझा हुआ और सामाजिक रूप से प्रभावशाली चेहरा मिला है, वहीं प्रणव वर्मा को भी संगठन के माध्यम से एक बड़ा जनाधार तैयार करने का मंच मिला है। यह रिश्ता दोनों के लिए “विन-विन” सौदा बनता नजर आ रहा है।
भाजपा के परंपरागत विधानसभा क्षेत्रों में अगर कुशवाहा समाज का एक बड़ा हिस्सा प्रणव वर्मा के नेतृत्व में झामुमो की ओर रुख करता है, तो कई सीटों पर समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।
कोडरमा, जहां से भाजपा लगातार जीतती आई है
डुमरी और गिरिडीह, जहां झामुमो को अपनी पकड़ मजबूत करनी है
बरकट्ठा, बगोदर, बड़कागांव, हज़ारीबाग जहां जातीय संतुलन झामुमो के पक्ष में जा सकता है
इन सभी सीटों पर अब एक नई लड़ाई बन सकती है।
भाजपा को इस बार उत्तरी छोटानागपुर में पहले जैसी एकतरफा लड़ाई नहीं मिलेगी।
प्रणव वर्मा, न सिर्फ अपने समाज के एक प्रमुख नेता के रूप में उभरे हैं, बल्कि झामुमो के लिए भी वे एक सामाजिक और रणनीतिक मोर्चे पर बेहद अहम चेहरा बन चुके हैं। अगर पार्टी उन्हें समय रहते सही मंच और मान्यता देती है, तो वे सिर्फ कोडरमा ही नहीं, पूरे प्रमंडल में झामुमो की नई पहचान बन सकते हैं।













