March 11, 2026 7:06 am

मानवाधिकार कोई आयातित विचार नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति की आत्मा में निहित- डॉ. रणधीर कुमार

मानवाधिकार कोई आयातित विचार नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति की आत्मा में निहित- डॉ. रणधीर कुमार

बिहार राज्य मानवधिकार अधिवेशन में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए डॉ रणधीर।

मानवाधिकार की जागरूकता एवं संरक्षण हेतु व्यापक कार्य करने की जरूरत : डॉ. रणधीर

 

नेशनल ह्यूमन राइट्स एंड क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (NHRCCB) के तत्वावधान में पटना के होटल चाणक्य में बिहार राज्य मानवाधिकार अधिवेशन-2025 का आयोजन हुआ। सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक चले इस ऐतिहासिक अधिवेशन में बिहार के विभिन्न जिले सहित देश के कई राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मानवाधिकारों की रक्षा, अपराध और अन्याय के खिलाफ जन-जागरूकता तथा समाज के अंतिम व्यक्ति तक समानता और न्याय पहुँचाना था।

अधिवेशन का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जो ज्ञान, ऊर्जा और आशा का प्रतीक है। इसके उपरांत अधिवेशन की स्मारिका (सोवेनियर) का लोकार्पण मुख्य अतिथि डॉ रणधीर कुमार, सहित अन्य अतिथियों एवं प्रदेश अध्यक्ष द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। यह स्मृतिका संगठन के कार्यों, उपलब्धियों और आगामी लक्ष्यों का लेखा-जोखा प्रस्तुत करती है।

मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ. रणधीर कुमार (राष्ट्रीय अध्यक्ष, NHRCCB) ने अपने उद्बोधन में कहा कि मानवाधिकार कोई आयातित विचार नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति की आत्मा में निहित है। उन्होंने पाटलिपुत्र की ऐतिहासिक धरोहर का उल्लेख करते हुए कहा कि यही भूमि हमें अहिंसा और न्याय का संदेश देती है। “हमें दीप से दीप जलाना है और समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय और सम्मान पहुँचाना है,” उनके इन शब्दों ने अधिवेशन को नई ऊर्जा और दिशा दी।

विशेष अतिथि प्रभात मिश्रा (राष्ट्रीय समन्वयक, NHRCCB) ने टीम भावना और व्यक्तिगत योगदान पर बल दिया। उन्होंने कहा कि “मानवाधिकार केवल अधिकार नहीं, बल्कि कर्तव्य भी है। यदि हर सदस्य प्रतिमाह एक सामाजिक कार्य करने का संकल्प ले, तो छोटे-छोटे प्रयास मिलकर समाज में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। बिहार जैसे राज्य में गरीबी, असमानता और नशाखोरी जैसी चुनौतियाँ अधिक हैं, इसलिए यह आंदोलन यहाँ से शुरू होकर पूरे भारत के लिए प्रेरणा बन सकता है।”

तेलंगाना से आए विशेष अतिथि सुरेश सिंह (प्रदेश अध्यक्ष, तेलंगाना) ने अपने संबोधन में कहा कि “मानवाधिकारों की रक्षा के लिए राज्यों के बीच सहयोग और अनुभवों का आदान-प्रदान बेहद ज़रूरी है। बिहार अधिवेशन ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब विभिन्न प्रदेशों के प्रतिनिधि एक मंच पर आते हैं, तो संकल्प और कार्ययोजना को असाधारण गति मिलती है।”

इस अवसर पर अधिवेशन संयोजक और बिहार प्रदेश अध्यक्ष शंभूनाथ झा ने कहा कि बिहार में असमानता, गरीबी और जातीय भेदभाव जैसी चुनौतियाँ अन्य राज्यों की तुलना में अधिक हैं। ऐसे में यहाँ मानवाधिकार चेतना को मजबूत करना अत्यंत कठिन कार्य है, लेकिन सबके सहयोग से यह संभव हो रहा है।

कार्यक्रम के दौरान समाजसेवा और मानवाधिकार क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कई व्यक्तित्वों को सम्मानित भी किया गया, NHRCCB Bihar Pride Award 2025 से सृष्टि सौम्या और पूजा कुमारी को सम्मानित किया गया।
NHRCCB Bihar Leadership Award 2025 से अजीत कुमार झा, डॉ. गगनदीप, रवि रंजन, कनहैया सिंह, राजा रॉकी, त्रिभुवन ठाकुर, सदानंद प्रसाद सिंह, मणिभूषण ठाकुर, आदित्य कुमार, संतोष कुमार राय और सुषांत कुमार को सम्मानित किया गया।
NHRCCB Bihar Human Rights Award 2025 शंभूनाथ झा, अमित कुमार झा और कुमारी आकांक्षा शर्मा को प्रदान किया गया।
जबकि NHRCCB Bihar Special Award 2025 किशलय रंजन और सुरेश सिंह राजपुरोहित को दिया गया।

अधिवेशन में विभिन्न विषय पर बल दिया गया जैसे कि —जिले एवं प्रखंड स्तर पर सक्रिय टीमें बनाना, प्रत्येक सदस्य का प्रतिमाह एक सामाजिक कार्य करना, बिहार को नशामुक्त बनाने के लिए अभियान चलाना, युवाओं और छात्रों को जोड़ना, अपराध व अन्याय के खिलाफ ठोस आंदोलन खड़ा करना, और दीर्घकालिक रूप से NHRCCB की विचारधारा को प्रदेश के हर जिले और ब्लॉक तक फैलाना।

समापन सत्र में सभी प्रतिनिधियों ने एक स्वर में संकल्प लिया कि वे ऐसा समाज बनाने में अपना योगदान देंगे, जहाँ हर नागरिक सुरक्षित, सम्मानित और सशक्त महसूस करे। अंत में राष्ट्रीय गान के साथ अधिवेशन का समापन हुआ।

Ranjan Kumar
Author: Ranjan Kumar

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