भाजपा की आदिवासी नायकों के नाम पर राजनीति निंदनीय है
झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) भाजपा द्वारा आदिवासी नायकों के नाम पर की जा रही राजनीति की कड़ी निंदा करता है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि भाजपा एक ओर भगवान बिरसा मुंडा, सिदो-कान्हू, तिलका मांझी, वीर बुधु भगत जैसे महानायकों का सम्मान करने का दिखावा करती है, वहीं दूसरी ओर झारखंड की संस्कृति, इतिहास और आदिवासी अस्मिता को लगातार ठेस पहुँचाती रही है।
भाजपा को इन महान बलिदानियों की विरासत और आदर्शों पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है, क्योंकि इसके शासनकाल में जल, जंगल और जमीन को कॉरपोरेट हितों के हवाले करने की कोशिशें की गईं। 2017 में लाया गया भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है, जिसका झामुमो और पूरे आदिवासी समाज ने डटकर विरोध किया और इसे वापस लेने को मजबूर किया।
बिरसा मुंडा जयंती को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ घोषित करना एक प्रतीकात्मक कदम भर है। भाजपा की नीतियां धरातल पर आदिवासियों के अधिकारों और जरूरतों को लेकर विफल रही हैं। न रोजगार मिला, न शिक्षा, न स्वास्थ्य, और न ही जीवन जीने की गरिमा।
2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में आदिवासी बहुल क्षेत्रों में भाजपा को जो हार मिली है, वह इस बात का प्रमाण है कि झारखंड की जनता अब उनके खोखले वादों और पाखंड को भली-भांति पहचान चुकी है।
हेमंत सोरेन जी के नेतृत्व में झामुमो ने हमेशा आदिवासी समाज के अधिकार, सम्मान और पहचान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। हम भाजपा के दोहरे रवैये को उजागर करते रहेंगे और झारखंड के गौरव, एकता और स्वाभिमान की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।













