रांची में ग्राम संसद का आयोजन, मुखियाओं ने रखी समस्याएं, दिए सुझाव
रांची, संवाददाता:
शनिवार को राजधानी रांची में झारखंड भर के पंचायत प्रतिनिधियों की एक विशेष ग्राम संसद का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों मुखियाओं ने भाग लिया। इस अवसर पर सरकार की योजनाओं की समीक्षा के साथ-साथ ग्रामसभाओं को सशक्त बनाने पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम में झारखंड सरकार की ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने कहा कि पहली बार कई सरकारी योजनाएं दूरदराज के आदिवासी गांवों तक पहुँची हैं। उन्होंने उपस्थित मुखियाओं से सुझाव आमंत्रित करते हुए कहा कि ग्रामसभाओं की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए जमीनी अनुभव अहम हैं।
इस अवसर पर राज्य के वित्त एवं वाणिज्य मंत्री राधामोहन किशोर ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि केंद्र सरकार की रुकावटों के बावजूद राज्य सरकार ने 4000 से अधिक ग्रामसभाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करने में सफलता प्राप्त की है।
ग्राम संसद में भाग लेने वाले कई पंचायत प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्र की समस्याओं को सामने रखते हुए उनके संभावित समाधानों की ओर भी ध्यान दिलाया।
कर्नाटक से आए विकेंद्रीकरण विशेषज्ञ सिद्धार्थ शर्मा ने कहा कि भारतीय संविधान में ग्रामसभा सबसे मूलभूत इकाई है, और इसे संसद एवं विधानसभाओं से अधिक महत्व मिलना चाहिए। उन्होंने अपनी बात को कहानियों के माध्यम से रोचक अंदाज़ में प्रस्तुत किया।
पंचायती राज विषय के जानकार और लेखक सुधीर पाल ने कहा कि समय आ गया है जब संविधान की सातवीं अनुसूची में ‘ग्रामसभा सूची’ को शामिल करने की माँग को लेकर आवाज़ बुलंद की जाए।
इसके अतिरिक्त राजीव गांधी पंचायती राज संस्थान के सुनीत शर्मा, सन्मत संस्था के अमित चौबे, चेंबर ऑफ कॉमर्स के डॉ. अमृतांशु प्रसाद तथा विकास सहाय सहित अन्य वक्ताओं ने भी पंचायतों की भूमिका को मजबूत करने के लिए अपने विचार रखे।
कार्यक्रम की परिकल्पना एवं संयोजन कुंदन सिंह द्वारा किया गया, जिन्होंने अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान भी किया। संचालन दूरदर्शन की श्रीमती सरोज ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन श्री चंदन ने प्रस्तुत किया।
यह ग्राम संसद, राज्य के पंचायत ढांचे को नयी दिशा देने की एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखी जा रही है।













